Wednesday, January 10, 2018

बाबाओं का मकड़जाल

     
                       भले ही हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं , किन्तु , अंधविश्वास और रूढ़िवादिता के मकरजाल से निकल नहीं पाए हैं। यही कारण है कि भारत में विशेष कर मंत्र -तंत्र , झाड़ -फूंक और बाबाओं का वर्चस्व बना है। अनपढ़ तो अनपढ़ , पढ़े लिखे भी इनमें उलझ जाते हैं।  हम बाबाओं पर आँख मूँद कर विश्वास  कर लेते हैं , अपना विवेक खो देते हैं। आज हम आये दिन तमाम समाचार पत्रों और टी . वी चैनलों पर इन पाखंडी  बाबाओं के कुकृत्य के समाचार से अवगत होते रहते हैं। इन सब के बाबजूद ऐसे बाबाओं के कारनामे बंद नहीं होते हैं। इनकी धर्म की दुकान फलती -फूलती रहती है।इसका कारण अशिक्षा का होना भी है। एक ओर हिन्दुस्तान में जहाँ इतनी गरीबी है , लोगों के पास सिर छिपाने के लिए अपना एक छोटा सा घर  नहीं है , वहीँ दूसरी ओर तथाकथित बाबाओं के पास बेसुमार दौलत होती है , बेहिसाब जमीन होती है , जहाँ ये अपना एक अलग  साम्राज्य स्थापित कर लेते हैं। इनकी अपनी एक अलग सत्ता होती है।  एक तरह से कुछेक तो राज्य सरकार के इतर समानांतर सरकार चलाते हैं।  इनकी अपनी फ़ौज होती है जो आधुनिक अस्त्र - शस्त्र  से भी सुसज्जित होती है  . ( राम - रहीम  इसके उदाहरण स्वरूप हैं। ) इनको सरकार का संरक्षण प्राप्त होता है। सरकार  कोई भी हो , इन्हें कौड़ी के भाव जमीन बेच देती है या फिर दान में दे देती है। आम आदमी के लिए जमीन  के  ऊँचे  भाव के कारण जमीन  खरीदना मुहाल होता है , परन्तु बाबाओं के पास कई - कई सौ एकड़ जमीन पड़ी होती हैं जहाँ धर्म और कर्म के नाम पर ऐय्यासियां होती हैं। ऐसे कितने ही  बाबा हैं जिनकी पोल खुली है और अभी और ऐसे कई बाबा होंगे जिनकी  पोल का अभी पता नहीं चल पाया होगा। ये तथाकथित बाबा लोगों में धर्म का डर बिठा कर , इहलोक और परलोक का भय दिखाकर , अपनी दैवीय शक्ति का हवाला देकर लोगों की आँखों में धूल  झोंकते हैं , उन्हें ठगते हैं। इस कार्य में परोक्ष रूप से नेताओं और सरकार भी शामिल हैं जो अपना उल्लू इन्हीं बाबाओं के माध्यम से साधते रहते हैं। अभी हाल - फिलहाल मध्य प्रदेश  सरकार ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया। लोग भी बाबाओं के बहकावे में आ जाते हैं जिनमें औरतें अधिक होती हैं  -  Soft  Target ..।
भले ही वे अपने पति के पैर नहीं पूजतीं  पर बाबाओं के पैर पूजने को तत्पर रहती हैं जिन्हें वे अच्छी तरह से जानती तक नहीं और बाबाओं के जाल में बुरी तरह से फँस जाती हैं। लोग बाबाओं को भगवान् की तरह पूजते हैं  , उनपर आँख बंद कर विश्वास करते हैं और ये बाबा उनकी आस्था से खिलवाड़ करते है और अनैतिक कार्य करते हुए  , सारी हदें पार कर  गुरु - शिष्य , भक्त और भगवान् के रिश्तों को शर्मशार करते हैं।  कई - कई तो संगीन अपराधों में लिप्त पाए गए हैं। धर्म की आड़ में बलात्कार , ह्त्या और धोखाधड़ी  ही इनका पेशा बन जाता है। ऐसे कितने ही बाबा हैं जिनकी अनैतिकता की पोल खुली और वे जेल गए। इनमें आशा राम , बाबा गुरमीत राम रहीम , स्वामी परमानंद ,नित्यानंद स्वामी , नारायण साई  , स्वामी भीमानंद महाराज, राधे माँ ,और बाबा रामपाल जेल जा चुके हैं। अभी - अभी ताजा नाम और कारनामा दाती महाराज  का आया है  जिन पर उन्हीं के आश्रम की शिष्या ने बलात्कार के गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे ही आरोपों ले कारण  आशा राम और नारायण साई अभी जेल में बंद हैं।वीरेंद्र देव दीक्षित का भी नाम जुड़ा है जिनके आश्रम से 41 लड़कियों को सीबीआई ने छुड़ाया था। तरस तो उन माँ - बाप पर भी आता है जो अपनी संतानों को  बिना सोचे - समझे , बिना जाँचे - परखे बेटे और बेटियों को आश्रमों में छोड़ देते हैं। इनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। राज्य के सरकारों को हरेक आश्रमों की पड़ताल कराते रहनी चाहिए और सभी राज्यों के आश्रमों की निष्पक्ष जाँच अलग से केंद्र सरकार को भी कराते रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त गाँव - कस्बों में गरीब और सामान्य वर्गों की उचित शिक्षा की व्यवस्था करानी चाहिए ताकि  इन बच्चों को किसी साधू - महात्मा के आश्रमों में ना जाना पड़े। ये तो अभी कुछ ही आँकड़े सामने  आये हैं अभी और कितने पाए जाएंगे उसका पता तो भविष्य में चलेगा। शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि सामाजिक ज्ञान और अच्छे - बुरे की पहचान  की होनी चाहिए।बाबाओं पर निगरानी के साथ - साथ इन पर नकेल भी कसी जानी चाहिए। आश्रमों में पलने और पढ़ने वाले बच्चे के भविष्य के बारे में सरकारों को भी सोचना चाहिए। अन्यथा ये बच्चे स्वयं के लिए और समाज तथा देश के लिए भी बोझ  ही होते हैं।  इनको सही शिक्षा देकर देश के विकास  की मुख्य धारा में जोड़ना चाहिए।