Friday, May 15, 2020

पके आम बहुत मीठे होते हैं

आपके धारावाहिकी लेख से कई महत्पूर्ण जानकारियां प्राप्त हो  रही हैं। आज से लगभग  २५०० वर्ष पूर्व ( ईo पूo ५५० को जोड़ कर ) भी भौतिक विज्ञान , रसायन विज्ञान ,खगोल विज्ञान ,गणित ,चिकत्सा विज्ञान ,जीव विज्ञान आदि क्षेत्रों में बहुत उन्नति हुई। आज हमें लगता है ,हम हर क्षेत्र में पीछे हो रहे हैं। अवैज्ञानिकता को ही विज्ञान समझ रहे हैं। बड़े पिल्लनि   ( २३ - ७९ ) जैसे व्यक्ति को देख कर ही लगता है यह लिखा गया होगा कि
पके आम बहुत मीठे होते हैं। धन्यवाद।

Wednesday, May 13, 2020

अकेला चना

एक पुरानी किन्तु प्रचलित कहावत है - अकेला चना भाँड़ नहीं फोड़ सकता। गाँव में हर शाम को चौपाल लगती थी। लोग मजे से गपियाते थे। कभी सनीमा और चित्रहार की बात करते तो कभी खेत - खलिहान पर चर्चा होती।  कभी -कभी तो राजनीति पर भी खूब बहस होती। गपियाने और बहस  के साथ - साथ वे चने -चबेने भी खाते -पीते  रहते।उनमें कुछ चने भींगे और कच्चे होते और कुछ भुने। पीने से मेरा मतलब दारू -वारू से नहीं है। बस हुक्का -चिलम और बीड़ी से है। बात -बहस के बीच वे कभी - कभी कहते सुने जाते  '' अकेला चना भांड नहीं  फोड़ सकता "।एक चने ने भी ये बातें कई बेर सुनी। उसकी समझ में नहीं आता कि ऐसा लोग क्यूँ कहते हैं। बात तो सोलह आने सच लगती है -उसने सोचा। जरूर कोई बात होगी। यही सोच कर वह उस रात सो गया। पर उसे नींद नहीं आई। रात भर करबटें बदलता रहा।दूसरे दिन सुबह थोड़े से चने को फूलने के लिए एक भांडे में डाल उसमें पानी भर दिया गया। शाम को जब भींगे और फूले चने निकाले गये  तो उनमें से एक चना भांड की पेंदी में  चिपक कर रह गया  । वह यह देखना चाहता था की इस घड़े में ऐसा क्या है जो यह बात कही जाती है। रात को उस भांड को रोज की तरह जहाँ रखा जाता था रख दिया गया। इत्तेफाक से उसमें एक छिपकली गिर गई और वह उससे बाहर नहीं निकल पाई। दूसरे दिन शाम को जब रोज की तरह उसमें चने डालने -फुलाने के लये निकाला तो  उसमें गिरे छिपकली देख कर उस भांड को बाहर निकाल कर बाड़ी में डाल दिया। यह भांड बहुत दिनों तक यहीं पड़ा रहा। चना उसी में पड़ा -पड़ा अंकुरित हो गया। फिर कुछ दिन बाद उसमें से कई जड़ें निकल आईं। वे जड़ें धीरे -धीरे पौध की शक्लें लेती हुई बहुत बड़ी -बड़ी हो गईं और एक दिन उस भांड को फोड़ कर बाहर आ गईं। वह चना बहुत खुश हो गया। उसने होने सभी चने भाईयों से कहा - अकेला चना भी भांड फोड़ सकता है।
मित्रों इस कहानी से क्या सीख मिलती है ?यह पाठकगण पर छोड़ते हैं।