A Tour To Srirangapatna
हमारी सोसाइटी के कतिपय वरिष्ठ नागरिकों ने मिल कर Srirangapatna
( जो कर्नाटक के मांड्या जिले में यहाँ से लगभग 140 किलोमीटर दूर है )Tour का
Program बनाया। Total 17 सदस्य हम थे। निश्चित तिथि 11 दिसम्बर 2024 को सुबह सवेरे 7 बजे Reserved बस से अपने सोसायटी से प्रस्थान कर गए। कुछ भक्ति भजन के साथ यात्रा का आनन्द लेते हुए हम ठीक सवा नौ बजे Tea और Breakfast के लिए एक Restaurant पाकशाला ( Paakshala ) पर रुके। इडली - सांभर , वडा और डोसा का ब्रेकफास्ट साथ में मजेदार चाय का भी आनंद लिया। यहाँ से चल कर हम सीधे रंगनाथस्वामी मन्दिर पहुँचे। (यह मंदिर कर्नाटक राज्य के मांड्या जिले के Srirangapatna में है)।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यह मंदिर बहुत पुरानी है। इस मंदिर में स्थित एक शिलालेख से पता चलता है कि इसका निर्माण पश्चिमी गंगा राजवंश के एक जागीरदार तिरुमलैया नाम के स्थानीय प्रमुख ने 984 ईo . में कराया था। हम मंदिर के मुख्य द्वार से जो गोपुरराम कहा जाता है , से अंदर प्रविष्ट हुए। मंदिर की विशालता , इसकी मोटी - मोटी दीवारें और खंभे देखते ही बनती थी। यह एक भव्य विष्णु मंदिर है। भगवान् श्री हरि विष्णु शेष शैय्या पर विश्राम की अवस्था में हैं। इसकी दीवारों और स्तंभों पर घोड़े , बाघ आदि की मूर्तियां बनी हुई हैं। इसका आर्किटेक्चर ( Architecture ) तमिल और द्रविड़ शैली में बना हुआ है। यह कावेरी और इसकी सहायक नदी कोल्लिदम के द्वारा बनी द्वीप पर बना है। इसका मुख्य द्वार ( गोपुरम ) करीब - करीब 236 फ़ीट ऊँचा है। इसके मुख्य द्वार को राजगोपुरम के नाम से जाना जाता है। यहाँ के दर्शन के बाद हम सभी निमिशाम्बा मंदिर ( Nimishamba Temple ) पहुँचे .यह मंदिर अधिक पुराना नहीं है। इतिहास से पता चलता है कि इसका निर्माण राजा वाडियार ने करवाया था। मंदिर का सम्पूर्ण निर्माण 1578 - 1617 के बीच हुआ। यह श्रीरंगापटना से लगभग 2 किलोमीटर दूर श्रीरंगापटना के तालुका के गंजम गांव में कावेरी नदी के तट पर स्थित है। यहाँ विशेष रूप से माँ पार्वती की पूजा होती है। यहाँ भगवान् अज्ञेश्वर ( भगवान् शिव ) तथा लक्ष्मीनारायण , हनुमान, सूर्यनारायण और गणपति की प्रतिमाएं भी हैं। यहाँ से चल कर हम सब टीपू सुल्तान पार्क पहुँचे। टीपू सुल्तान को शेर - ए - मैसूर या मैसूर का शेर कहा जाता है।पार्क के गाइड ने बताया कि टीपू सुल्तान का किला बहुत पुराना और जर्जर हो जाने के कारण यहाँ कुछ अवशेष धरोहर के रूप में अस्थायी तौर पर रखा है। यहाँ से चल कर हम सब ने होटल पहुँच कर दोपहर का भोजन किया। तत्पश्चात हम सभी Ranganathittu Bird Sanctuary पहुँचे। यह एक प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य है। यह मौसमी प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के विभिन्न विभिन्न प्रजातियों के लिए घोंसला बनाने का सुरक्षित अभयारण्य है। यहाँ पर Lake के दोनों किनारों पर सघन पेड़ लगे थे। Lake के दूसरी ओर के किनारे के पेड़ों पर बहुतायत में पक्षी दीख रहे थे। इस Lake में Boating की व्यवस्था थी और समय को देखते हुए इस समय Birdwatching केवल Boat से ही संभव था। मैं Boat से जाने को तैयार था , तभी Col. Shree Vijayan Ji एवं श्री चंद्रशेखर जी ने कहा कि सिन्हा जी अकेले Boat पर नहीं जाएंगे। ऐसा कह कर उन्होंने श्री प्रेम नाथ प्रसाद जी को मेरे साथ भेज दिया। यह बात मुझे बहुत अच्छी लगी। उन्हें पूरे टीम के साथ - साथ मेरा भी ख्याल था कि असुरक्षित ना रहें , क्योंकि Boating इतना भी सरल नहीं था। Lake में बहुतायत में मगरमच्छ ( Crocodile ) रहते हैं। मैंने चलती नाव पर से ही भ्रमण करते हुए भिन्न - भिन्न प्रजाति के कई पक्षियों के फोटो लिए। मुझे वहाँ उड़ान भरते हुए Eurasian Spoonbill मिले साथ ही उड़ान भरते हुए ही River Tern और Spot - billed - Pelican के साथ कई Birds मिले। मैंने कई मगरमच्छ देखे, कुछ तो पानी में तैर रहे थे और कई Lake के बाहर जमीन पर बैठे आराम कर रहे थे मैंने मगरमच्छ(Crcodile) के भी कई फोटो लिए। Spot -billed Pelican की तो कई पेड़ों पर पूरी Colony ही बसी थी। यहाँ से हम सभी Bangalore वापस हो लिए। रास्ते में एक Restaurent पर रूक कर हम सभी ने शाम की चाय का भी आनन्द लिया सायं 8.15- 8.30 बजे तक हम अपने घर पहुँच गए। कुल मिला कर Tour बहुत आनंददायक था। एक नया उत्साह और रोमांच Ranganathittu Bird Sanctuary का तो था ही , साथ ही इतने लोगों का साथ भी रहा। मैं Col. Shree Vijayan, Shree Chandrashekhar जी , Shree Premnath Prasad जी तथा टीम के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूँ।