Wednesday, September 9, 2020

8  अप्रैल 2020 को मैं सुबह में खिड़की से बाहर झाँक रहा था।  तभी मैंने अपनी सोसायटी  के बाहर एक सड़क के कुत्ते को देखा जिसके मुँह में एक प्लास्टिक का Jar बुरी तरह फंसा हुआ था। उसे कुछ दिनों से पानी भी नहीं नसीब हुआ था। वह इधर - उधर भाग रहा था। मैंने कोशिश करके उसका फोटो ले लिया और फिर अपने बेटे से कहकर इसे संबंधित संस्थाओं को भिजवा दिया। संस्था के लोग एवं सोसाइटी के लोग कल से आज तक उसे बचाने के प्रयास में लगे रहे और आज  (9 अप्रैल 2020) अपने दो दिनों के प्रयास से उस पीड़ित कुत्ते को जाल में पकड़ कर उसके मुँह से वह Jar निकाल कर कुत्ते को  पीड़ा से मुक्त कर दिया। यह सब हम (पत्नी, बेटा और बहू) अपने कमरे की खिड़की से देख रहे थे।  हम सभी यह देख कर बाहत खुश हुए।  हमने खिड़की से ही हाथ हिला कर  उनका धन्यवाद किया। यहाँ दो फोटो, एक जिसमे कुत्ते के मुँह में Jar अटका है और दूसरा उसको रेस्क्यू करते समय का ह

अकाट्य सत्य

यह अकाट्य सत्य है कि यदि किसी को गुलाम बनाना हो तो सबसे पहले उसके आर्थिक ढाँचे की हड्डी तोड़ दो। निश्चय ही यह आर्थिक हड्डी पेट की अग्नि से जुड़ा है। पेट की अग्नि से मतलब है व्यक्ति की क्षुधा से।
इसी आधार पर शेर,बाघ ,हाथी , कुत्ता और अन्य जानवरों ( पालतू पशु भी इनमें शामिल हैं ) को वश में किया जाता है। पेट की आग , पेट की भूख एक ऐसी आग है जो इन्सान को कुछ भी करने को मजबूर कर देती है। पुराने समय में जब युद्ध होते थे तो सबसे पहले शत्रु के राशन -पानी बन्द कर दिए जाते थे ताकि दुश्मन आत्मसमर्पण कर दे। ऐसे उदाहरण इतिहास में बहुत मिलते हैं। स्थितियां आज भी कमोबेश वैसी ही है।