यह अकाट्य सत्य है कि यदि किसी को गुलाम बनाना हो तो सबसे पहले उसके आर्थिक ढाँचे की हड्डी तोड़ दो। निश्चय ही यह आर्थिक हड्डी पेट की अग्नि से जुड़ा है। पेट की अग्नि से मतलब है व्यक्ति की क्षुधा से।
इसी आधार पर शेर,बाघ ,हाथी , कुत्ता और अन्य जानवरों ( पालतू पशु भी इनमें शामिल हैं ) को वश में किया जाता है। पेट की आग , पेट की भूख एक ऐसी आग है जो इन्सान को कुछ भी करने को मजबूर कर देती है। पुराने समय में जब युद्ध होते थे तो सबसे पहले शत्रु के राशन -पानी बन्द कर दिए जाते थे ताकि दुश्मन आत्मसमर्पण कर दे। ऐसे उदाहरण इतिहास में बहुत मिलते हैं। स्थितियां आज भी कमोबेश वैसी ही है।
इसी आधार पर शेर,बाघ ,हाथी , कुत्ता और अन्य जानवरों ( पालतू पशु भी इनमें शामिल हैं ) को वश में किया जाता है। पेट की आग , पेट की भूख एक ऐसी आग है जो इन्सान को कुछ भी करने को मजबूर कर देती है। पुराने समय में जब युद्ध होते थे तो सबसे पहले शत्रु के राशन -पानी बन्द कर दिए जाते थे ताकि दुश्मन आत्मसमर्पण कर दे। ऐसे उदाहरण इतिहास में बहुत मिलते हैं। स्थितियां आज भी कमोबेश वैसी ही है।
No comments:
Post a Comment