Thursday, February 20, 2014

प्रचार ( विज्ञापन ) में हिंदी

     ( १  )   प्रस्तावना

       प्रचार ( विज्ञापन ) में हिंदी का बहुत महत्व है। आज के  औद्योगिक जगत में ही नहीं  हर क्षेत्र में प्रचार की उपयोगिता सफलता के सोपान छू रही है। हर वस्तु की जानकारी प्रचार के माध्यम से सुलभ हो रही है। जिसका जितना प्रचार वह उतना ही प्रचलित। उपभोक्तावादी वस्तुओं से लेकर समाज और जीवन से जुड़ी प्रत्येक वस्तु का प्रचार चरम पर है। " प्रचार "भी एक कला है जो उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
      आज से चालीस-पचास वर्ष पूर्व प्रचार के इतने माध्यम नहीं थे जितने आज उपलब्ध हैं। प्रचार की अनुपलब्धता के कारण प्रचार के लिए क्षेत्र भे सीमित  रह जाता था जबकि आज इसका क्षेत्र असीम है। छोटी से छोटी वस्तुओं से लेकर शिक्षा, व्यवसाय, सरकारी -गैरसरकारी योजनाओं के कार्यकलाप और चुनाव तक प्रचार से प्रभावित हो रहे हैं।
      ( २  ) प्रतिपादन  ( हिंदी में प्रचार की आवश्यकता  )
       पहले दैनिक जीवन के उपयोग की कुछ वस्तुओं का, जैसे चाय, बिस्कुट, सर्फ़ पाउडर, टूथपेस्ट, सिगरेट आदि का प्रचार औद्योगिक संस्थाओं द्वारा गांव, कस्बा और शहर में मुफ्त बाँट कर और प्रदर्शन कर कराया जाता  था, इसमें धन खर्च के अलावा समय भी बहुत लगता था और बहुत अधिक परिश्रम भी करना पड़ता था। बावजूद  इसके कुछ और भी क्षेत्र जैसे शिक्षा, व्यवसाय, भविष्य की योजनाओं के लिए बचत आदि के बारे में आम आदमी के बीच जानकारी का अभाव ही रहता था। कारण था कि एक तो प्रचार कम था दूसरे अंग्रेजी भाषा की ही बहुलता थी। बचत के महत्व को समझते हुए भी आम आदमी विशेषकर ग्रामीण वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग की कुछ मजबूरियाँ थीं। मसलन बैंक हो, पोस्ट-ऑफिस हो या बीमा-योजना  या कोई अन्य, सब जगह फॉर्म -प्रपत्र अंग्रेजी भाषा में ही होते थे। आवश्यकता पड़ने पर रूपये -पैसे निकालने में परेशानी होती थी। कभी -कभी  बहुत अधिक विलंब भी हो जाया करता  था । बाहर रूपये भेजना हो तो बैंक-ड्राफ्ट या मनी-आर्डर के अलावा कोई दूसरा सरल साधन नहीं था। स्वयं साथ में ले जाने पर लुटने का ख़तरा अधिक था। आज हर छोटा - बड़ा आदमी भविष्य के लिए बचत करना चाहता है। साधारण आम आदमी, यहाँ तक कि कम शिक्षित और अनपढ़ लोग भी हिंदी के माध्यम से बचत के महत्व बताये या दिखाए जाने पर आसानी से समझ जाते हैं। अत: प्रचार को हिंदी भाषा में की जाने की आवश्यकता महसूस की गई जिससे प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक उत्पाद और प्रत्येक योजनाओं की जानकारी सुलभता से प्राप्त हो सके। जुलाई १९६९  में बैंको का राष्ट्रीयकरण के पश्चात अधिक से अधिक शाखाएं बढ़ाई गईं और इसे गाँव -गाँव तक पहुँचाया गया ताकि ग्रामीण, किसान, मध्यम और निम्न वर्ग के लोग भी ज्यादा से ज्यादा लाभ उठा सकें। वर्ष १९९४ में बैंको का तकनीकीकरण आरंभ हुआ और आज सभी बैंक और पोस्ट ऑफिस तकनीकी रूप से विश्व के हर कोने से जुड़ गए हैं। हर काम मिनटों में हो जाता है। इसका श्रेय तकनीक में उन्नति तथा  हिंदी में प्रचार और प्रसार को ही जाता है।
         (३ ) प्रचार का माध्यम
     आज प्रचार के कई माध्यम हैं। प्रिंट मीडिया और तकनीकी रूप से इलेकट्रोनिक मीडिया की  महती भूमिका है । प्रिंट मीडिया में हिंदी के अखबार, पत्र - पत्रिकाएं, पोस्टर, बैनर, पैम्पलेट आदि का स्थान है तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में टी. वी और हिंदी फ़िल्में सशक्त और सक्षम भूमिका निभा रहीं हैं जिनमें श्रव्य (सुन कर ), दृश्य ( देख कर )और चित्रांकन ( चित्र दिखा कर ) द्वारा भी प्रचार बो बल मिलता है। आज हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कारण गांव -गांव, कस्बे -कस्बे तक पहुँच गए हैं। यहाँ तक कि हम आज विश्व के एटलस पर हर देश से जुड़ गए हैं।
     यह आज के तकनीकी युग की बड़ी देन है जिसमें भाषा का रूपांतर भी सम्मिलित है । अब प्रचार के लिए भटकने की आवश्यकता नहीं है। हम इन उपलब्ध माध्यमों से जन - जन को जागरुक करने में समर्थ हैं। वह प्रचार उपभोक्तावादी वस्तुओं, मकान -दुकान, पंखा, फ्रिज, कूलर, कार, स्कूटर- बाइक, बिजली  इन्वर्टर हो या कॉस्मेटिक सामान हो या शैक्षणिक संस्थाओं, व्यवसायों का , हम अधिकाधिक लाभान्वित हो रहे हैं।

      (4 ) निष्कर्ष  
       प्रचार के भाषा के महत्व को कम करके नहीं आँका जा सकता है। हिंदी हमारी मातृभाषा, राजभाषा  तो है ही साथ-साथ यही  हमारी संपर्क भाषा भी है। किसी भी वस्तु या विविध कार्यों और योजनाओं के लिए हर क्षेत्र में हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो अति सरलता से जन - मानस के मन- मस्तिष्क और दिल-दिमाग पर छा जाता है। आज सभी उत्पाद का महत्व हिंदी के माध्यम से प्रचार के कारण ही बढ़ा है। आज हिंदी माध्यम से किये गए विज्ञापन / प्रचार के शब्द बच्चे - बच्चे की जुबान पर है।
        क्षेत्रवाद की बात हम छोड़ दें तो हम अपनी बात हिंदी में जितनी आसानी से कहते और समझते हैं वह शायद दूसरी भाषा में नहीं। पंजाब, हिमाचल, अरुणाचल, आसाम, बंगाल हो, या केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश या तामिलनाडू , हर प्रदेश में हिंदी बोलने और समझने वालों  की बहुतायत है। आज सभी जगह  हिंदी ने अपना स्थान बना लिया है। हर प्रकार के पत्र - प्रपत्र में,  प्रचार में हिंदी का उपयोग होने लगा है।
         सर्वविदित है कि सभी उत्पाद के वस्तुओं और योजनाओं का हिंदी में किया गया          विज्ञापन जन-मानस पर विशेष छाप छोड़ता है। अत: हम दावे के साथ कह सकते हैं कि प्रचार में हिंदी की उपयोगिता के महत्व को हम झुठला नहीं सकते हैं।
    

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